माँ कामाख्या स्तुति |
जयति जयकामाख्या माता, जयति जय कामाख्या माता |
तुमिही होकाली तुमिहीहोतारा , सब के मन को भाता |
तुमिही हो राधा तुमिही हो सीता, तुमिही सार सब गीता |
तुमिही सत्य हो तुमिही धर्म हो, तुमिहीहोपालन माता |
महिमा तेरी बड़ी निराली, जग मोहनी वि |
दसो विद्या का रूप धरयो हो , जन जन में है समाता |
तेरे सरन में जो कोई आता, ख़ाली |
मन से उर में बसा लिया माँ , येसा बना दे नाता |
बंधन ऐसा बाध दे माता , तुमिही |
तुमिही से सारी सृष्टीबनी है, तुमिही हो सब की ज्ञाता |
कमलासन में तुमिही बिराजी, हंश वाहनी म |
आहंकर को नस्ट करो माँ , ब्रह्म ज्ञान वर दाता |
दुर्गति नाशिनी दुर्गा बनके , कहलाती जग |
जो जिस रूप भजता तुमको, उसी रू |
सबकी बात समझती मईया , त्रिपु |
जयति जयकामाख्या माता, जयति जय कामाख्या माता |
त्रिवेणी शंकर मिश्र (संगम) |
माँ कोसमर्पण त्रिवेणी शंकर मिश्र गाँव का नाम लोही
त्रि -त्रिलोक पती गावै तेरा नाम , मैया त्रिलोक पती गावै तेरा नाम !
वे - वेद पुराण उन्ही को आबे, ज ो लेबे तेरा नाम !
नी - नीर - छीर की तरह विवेचन , उज्जवल तेरा काम !
शं- शंकर विष्णु निस दिन गावे, गावे तेरा नाम !
क - करो कृपा मुझ पर तूअंवे , गाऊ तेरा नाम !
र - रहू सदा सेवा में तेरे , ये सा दे वरदान !
मि - मिलती है तू उन सब को , जो लेवे तेरा नाम !
श्र - श्रवण करू और गाऊ मैया, धयायु तेरा नाम !
लो - लोलुपता और राग द्वेष का , हरण करे तेरा नाम !
ही - हीन नही अब पाकर तुझको, गा ऊ तेरा गान !
jivan safal ho gaya
ReplyDeletejinke upar ma ki kripa hoti hai unka bimba yahi hota hai
ReplyDeletesadhak maa
maharishi tantra
aap se milane ka dil hota hai gudav
ReplyDeletepriti
jaipur
JAI GUR DEV AAP KE ANDAR SANGAM TRIVENI PAVITRATA KA ANUTHA SANGAM HAI ....
ReplyDeletePRATAP SINGH
RAJKOT