Divya Vichar (Daily Updated)


दिव्य विचार स्वप्रेरणा    
(अंदर से सन्यास बाहर से संसार के अभ्यास से ही धरती पर हस्त हुआ जीवन मिलेगा )

1---> लज्जा,  घृणा और भय जिन्हें नहीं सताता एबं जिनका चिंतन सदेव यही रहता है कि  आत्मा मोक्ष  हो तथा जगत का कल्याण हो ऐसे मानव पृथ्वी के देवता होते है

2 ---> अधिकार लालसा और ईर्षा से दूर रहने पर आत्म विश्वास जाग्रति होता है 

3---> नारी , मदिरा तथा धन - ये तीन प्रकार के  माद्य  होते है  ! इनमे से एक देखने मात्र से ,दूसरा पीने  और तीसरा अति संचय से उन्मत्त बना देता है !

4--->वासना - कामना का त्याग करना सुमेरु पर्वत को उखाड़ने से भी अधिक कठिन है !

5 --->जो व्यक्ति  परोपकारी है , परदुख से दुखी है और अंतरात्मा के शीतल बुद्धि के द्वारा ज्ञानी है , उसी को मै सुखी मानता हूँ !


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त्रिवेणी संगम


माँ कामाख्या स्तुति
जयति जयकामाख्या माताजयति जय कामाख्या माता
तुमिही होकाली तुमिहीहोतारा सब के मन को भाता
तुमिही हो राधा तुमिही हो सीतातुमिही सार सब गीता
तुमिही सत्य हो तुमिही धर्म हो, तुमिहीहोपालन माता
महिमा तेरी बड़ी निरालीजग मोहनी विधाता
दसो विद्या का रूप धरयो हो जन जन में है समाता
तेरे सरन में जो कोई आता, ख़ाली हाथ न जाता
मन से उर में बसा लिया माँ , येसा बना दे नाता
बंधन ऐसा बाध दे माता तुमिही से हो जाय नाता
तुमिही से सारी सृष्टीबनी है, तुमिही हो सब की ज्ञाता
कमलासन में तुमिही बिराजीहंश वाहनी ाता
आहंकर को नस्ट करो माँ , ब्रह्म ज्ञान वर दाता
दुर्गति नाशिनी दुर्गा बनके , कहलाती जग माता
जो जिस रूप भजता तुमकोउसी रूप में पाता
सबकी बात समझती मईया , त्रिपुरसुन्दरी माता
जयति जयकामाख्या माताजयति जय कामाख्या माता
त्रिवेणी शंकर मिश्र (संगम)


माँ कोसमर्पण त्रिवेणी शंकर मिश्र गाँव का नाम लोही
त्रि -त्रिलोक पती गावै तेरा नाम मैया त्रिलोक पती गावै तेरा नाम !
वे - वेद पुराण उन्ही को आबे लेबे तेरा नाम !
नी - नीर - छीर की तरह विवेचन , उज्जवल तेरा काम !
शंशंकर विष्णु निस दिन गावेगावे तेरा नाम !
 - करो कृपा मुझ पर तूअंवे , गाऊ तेरा नाम !
 - रहू सदा सेवा में तेरे , येसा दे वरदान !
मि - मिलती है तू उन सब को जो लेवे तेरा नाम !
श्र - श्रवण करू और गाऊ मैयाधयायु  तेरा नाम !
लो - लोलुपता और राग द्वेष का , हरण करे तेरा नाम !
ही - हीन नही अब पाकर तुझकोगा तेरा गान !