दिव्य विचार स्वप्रेरणा
(अंदर से सन्यास बाहर से संसार के अभ्यास से ही धरती पर हस्त हुआ जीवन मिलेगा )
1---> लज्जा, घृणा और भय जिन्हें नहीं सताता एबं जिनका चिंतन सदेव यही रहता है कि आत्मा मोक्ष हो तथा जगत का कल्याण हो ऐसे मानव पृथ्वी के देवता होते है
2 ---> अधिकार लालसा और ईर्षा से दूर रहने पर आत्म विश्वास जाग्रति होता है ।
3---> नारी , मदिरा तथा धन - ये तीन प्रकार के माद्य होते है ! इनमे से एक देखने मात्र से ,दूसरा पीने और तीसरा अति संचय से उन्मत्त बना देता है !
4--->वासना - कामना का त्याग करना सुमेरु पर्वत को उखाड़ने से भी अधिक कठिन है !
5 --->जो व्यक्ति परोपकारी है , परदुख से दुखी है और अंतरात्मा के शीतल बुद्धि के द्वारा ज्ञानी है , उसी को मै सुखी मानता हूँ !
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