दिव्य विचार स्वप्रेरणा
(अंदर से सन्यास बाहर से संसार के अभ्यास से ही धरती पर हस्त हुआ जीवन मिलेगा )
1---> लज्जा, घृणा और भय जिन्हें नहीं सताता एबं जिनका चिंतन सदेव यही रहता है कि आत्मा मोक्ष हो तथा जगत का कल्याण हो ऐसे मानव पृथ्वी के देवता होते है
2 ---> अधिकार लालसा और ईर्षा से दूर रहने पर आत्म विश्वास जाग्रति होता है ।
3---> नारी , मदिरा तथा धन - ये तीन प्रकार के माद्य होते है ! इनमे से एक देखने मात्र से ,दूसरा पीने और तीसरा अति संचय से उन्मत्त बना देता है !
4--->वासना - कामना का त्याग करना सुमेरु पर्वत को उखाड़ने से भी अधिक कठिन है !
5 --->जो व्यक्ति परोपकारी है , परदुख से दुखी है और अंतरात्मा के शीतल बुद्धि के द्वारा ज्ञानी है , उसी को मै सुखी मानता हूँ !
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log kahate hai ki duniya me bahut hai unme se aap hai
ReplyDeletejai maa
sadesh
bahut sunder
ReplyDeleteAap ki jay ho gurudev...
ReplyDeleteAap avatari purush he...
Aap aane wale samay me world famous ho ne wale he..
Aap ko abhi dunia ke log manav mankar murkhata kar rahe he...
Aap hi sansar se dukh kashth mita sakte he..
Aap garibo ke taran har hone wale he....
Nirmala Bhopal
aap ka sanidhya hi mera beda par kar sakta he...
jai maa
ReplyDeletenirmala jee aap ke bicharo ka samman